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Hymn No. 1462 | Date: 20-Dec-1999
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प्रभु कर ले प्रवेश इस भग्न मन – मंदिर में आज तू।
प्रभु कर ले प्रवेश इस भग्न मन – मंदिर में आज तू।
ऐसी कौन सी जगह है इस जहाँ में जहाँ प्रभु तू नहीं।
फरियाद ना कर रहा हूँ कोई तुझसे, यें तो है यादों का सिलसिला।
जब तक चलता है तूफाँ दिल में काम का, टिकता नहीं मन कहीं।
पाता हूँ ठोकर जब जमाने से, याद तुझे करता हूँ बहुत।
जब – जब लगा आया ठहराव, तब – तब उठा मन में तूफा।
सम्भाले नहीं समझता हूँ, यहाँ वहाँ अचारों और बिखर जाता हूँ टूटके।
कब तक चलेगा खेल तेरा, फँसा हूँ मैं तन – मन के जेल में।
अंदाज न था हमको बन आयेगी जान पे हमारे।
हूँ मैं तेरे सहारे जाना नहीं किसी ओर के द्वारे।


- डॉ.संतोष सिंह