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Hymn No. 1677 | Date: 21-Apr-2000
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ऐ जगत के कर्ता - धर्ता, देर ना कर अँधेर है हमारी दुनिया में।
ऐ जगत के कर्ता - धर्ता, देर ना कर अँधेर है हमारी दुनिया में।
हर ले हमारे सुख – दुखों को, हो जाने दे मस्त तेरे प्यार में।
चाहत है अनेक, मोड़ दे हर चाहतों का मुख, और तेरे हो जायेगे मस्त।
सवाल उठते है कई मन में, भर दे प्यार उनमे हो जायेगा मजबूर जवाब देने को तू।
ख्वाब आते है कई तरह के, हर ख्वाबों में आ जाये तू – हो जायेगा निरर्थक का अर्थ।
बेमतलब की करता हूँ बातें, करते हुये खों जाऊँ तुझमें, जल उठेंगे दिल में चिराग प्यार के।
अनायास करता हूँ कई कार्य, सौंपना सीख जाऊँ तुझे तो हो जाये मतलब उनका।
आदतें है अनेक, दे दूँ उनकी शहादत तुझपे, निखर जायेगा जीवन मेरा वास्ते तेरे।
बदनाम हूँ मैं बहुत दिल से दिल जुड़ जाऊँ जो तुझसे – जीते जी हो जाऊँगा परे सबसे।
कमाई ना है बहुत, कमा लेने दे नाम तेरा, हर अंजाम में आयेगा काम ये।
- डॉ.संतोष सिंह
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