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Hymn No. 18 | Date: 01-Jul-1996
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अरज करता हूँ, तुझसे क्या नाम है तेरा?
अरज करता हूँ, तुझसे क्या नाम है तेरा?
बनाने वाला तू है मिटाने वाला तू ही ।
क्या खोया तूने ; क्या पाया मैंने?
अब तक जाने न पाया ......
क्यों भेजा है तूने, क्या चाहता है तू मुझसे
अब तक कुछ भी समझ न आया ......
देना है तो दे मेरे इन सवालों का जवाब
गुत्थियों में ना देना ।
जब तेरी ही दुनियादारी में मैं उलझ गया हूँ;
तो क्या सुलझा पाऊँगा तेरी गुत्थियाँ ।
- डॉ.संतोष सिंह
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