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Hymn No. 1878 | Date: 19-Jul-2000
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प्रभु मिले होंगे जगत में भक्त अनेक तुझे, मिलेगा ना मुझसा एक।
प्रभु मिले होंगे जगत में भक्त अनेक तुझे, मिलेगा ना मुझसा एक।
खाये ठोकरे तेरे दीदार के वास्ते, इस पापी ने किया पाप तेरे नाम पे।
लुटाया उन्होंने सबकुछ तेरे नाम पे, मौका मिलते लगायी झड़ी हमने फरियादों की।
जीवन के हर मोड़ पे ली कड़ी से कड़ी परीक्षा, थोड़ा सा कुछ होते चिल्ला पड़ते है तुझे।
अपने गुरू का कहा करने के वास्ते ना की परवाह, हर बार अपने मुताबिक बदलना चाहा तुझे।
कोई कोर – कसर ना छोड़ी तेरे वास्ते, लाखों बार समझाने पे तेरे दोहरायी वही पुरानी गलती।
रीझा के बसाये दिल में अपने, यहाँ तो हुआँ उलटा – उचटा दिल कई बार तेरा।
इस तरफ तो हंसके किया अंगीकार गमों को, यहाँ गम होने पे दोष दिया तुझको।
इतने पे ना छोड़ा पीछा तूने हमारा, पिता कहके न छोड़ा कहींका तुझे।
पहले तो हमने चाहा था अब तूने पकड़ ली बाँह तो न छोडूंगा कभी।
- डॉ.संतोष सिंह
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