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Hymn No. 1955 | Date: 26-Aug-2000
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बेखबर होने निकला था तेरे प्यार में, पर बन गया प्रभु चलता फिरता अखबार।
बेखबर होने निकला था तेरे प्यार में, पर बन गया प्रभु चलता फिरता अखबार।
बड़ बड़ाके निकला दम, फिर भी न हुये पूरे एक भी सपने जो लेके देखे थे सुझे।
सुझता ना है कुछ, तेरे रहते हूये हो गयी है हालत मेरी सूरदास जैसी।
कैंसे भी हो हालत फरक नहीं पड़ता तन मन पे प्रभु हो अगर साथ तेरा।
निश्चिंतता छायी रहती है मन में, जब – जब महसूस करता हूँ तुझे पास अपने।
खोया बहुत कुछ किया था ऐसा – वेसा, पर अटक भटक करके कैसे भी आया पास तेरे।
तेरा कहाँ हुआँ न माना कभी, पर परिणाम आने पे पड़ा पीछे जी जान से तेरे।
तू दान में दे या मान करके हमे मंजूर है जरूर पड़ने पे करके लूंगा सर फोड़के ले।
होगी और भी कोई कमी जिन्हे दूर करना मेरे वश में नहीं उसे दूर करना पड़ेगा तुझे।
सूझे ना मुझे तेरे सिवाय कुछ भी, कह सकता है तू इसे दिखावा पर मेरे वास्ते है ये सही।
- डॉ.संतोष सिंह
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रहे चाहे कितनी भी दूरी तेरे मेरे बीच, पर रहने न देना दिल को दूर तुझसे।
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