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Hymn No. 2036 | Date: 14-Oct-2000
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जिस दिन इसे जानोगे, अपना होके अपना हो न पाओगे।
जिस दिन इसे जानोगे, अपना होके अपना हो न पाओगे।
इसकी बात कुछ अलग है, दुनिया के संग रहके होगे जुदा दुनिया से।
खेल खेल मे सिखलाये अगूढ़ बातें, हर के हमारे संताप को।
कहा जिसने कर दिखाया इसका, बिना साधना के परम् को पाया।
इक् बार को छोड़ साथ साया भी, पर इसने जो पकड़ा हाथ फिर न कभी छोड़ा।
तारता रहा है हमको हमेशा से, देते समय भी न कभी हिचकिचाया।
विशेष रहके बना रहा साधारण, सरलता से कठिन मंजिल को जीतना सिखाये।
सब कुछ बसाया हुआ है इसका, फिर भी सबके अस्तित्व को देता रहा महत्व।
ऊपर है ये कही सुनायी हुयी कहावतें से तोड़ता रहा अपनी बसायी हुये धारणाओं को।
जिसने पायी इक् बार शरण चरणों में इसके बैठे ठाले पा लिया सारे ब्रम्हाण्ड को।


- डॉ.संतोष सिंह