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Hymn No. 2232 | Date: 04-Apr-2001
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तेरे ईल्जामों से न है कोई शिकवाई, रूसवाई तो है अपने आप से।
तेरे ईल्जामों से न है कोई शिकवाई, रूसवाई तो है अपने आप से।
काबिले तारीफ करने चलूं तो चूकते है अल्फाज मेरे, तेरे साथ रहके साथ नहीं मैं जो।
जीता हूँ जिंदगी कितने गलतअंदाज में जो बात बनने चलती है बिगड़ जाती है करमो से।
डेरा डाल रखा हूँ न जाने कब से तेरे दर के आगे, बड़ी नफासत से किया है नजरअंदाज तूने।
फिर भी कोई गम नही चाहे गम में डूबी है जिंदगी, पर जब भी पायेगा आऊँगा मुस्कराते।
नजर बचाके चलेगा तू कही गिरफ्त में न आ जाये मेरे, फिर भी रूखसत होने न दूंगा कभी।
डरना मत न ही कहने से तू रोकना कभी चाहे हो जाये कुछ करूंगा न फरियाद।
हासिल हो या न हो गफलत में जीने वालों में से मैं नहीं, उल्फत का कोई नाम न लूंगा।
अरे। पिलाया है तूने हमको प्यार से प्यार का जाम, लगने ना दूंगा कोई इल्जाम तुझपे।
संजोने की न है आदत हमको चाहे अच्छा हो या बुरा, बिखरने से न कभी रहा हूँ डरता।
- डॉ.संतोष सिंह
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एक एक पल के लिये शुक्रगुजार हूँ मालिक तेरा।
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कहने को तो कहता है दिल कई बार अपने आप से, तेरे बिन गुजरता नहीं दिन।
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