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Hymn No. 2244 | Date: 10-Apr-2001
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अब की न जाना है, मन की गलियों में, प्रभु तेरा प्यार पाना है।
अब की न जाना है, मन की गलियों में, प्रभु तेरा प्यार पाना है।
दिल के बताये राहो पे कुछ कर दिखाना है, चित्त की वृत्तियों का निरोध करके।
परम पुरूषार्थ से तुझे जीत लेना है, भाग्य की दिशाओं का मुख मोड़के।
सारी कुशंकाओं के चक्रव्यूह को तोड़के, तन मन से तेरा हो जाना है।
निराशाओं के पाश को तोड़के, प्रियतम तेरे प्रेम पाश में बंध जाना है।
दोष न देना किसीको, दृड़ता से कदम दर कदम तेरी ओर बढ़ते जाना है।
सानी नहीं रखते अपने आप में, फिर भी तेरे किये पे पानी नहीं फेरना है।
हार को मार भगाना है, जो तेरे सपनो को साकार का दिखाना है।
दुश्चिंताओं को छोड़के दौड़के तेरे गले लग जाना है, ऐसा नया कुछ कर जाना है।
अमर प्रेम पथ पे कोई नया राग छेड़ जाना है, जहाँ तू पलके बिछाये करे इंतजार।
- डॉ.संतोष सिंह
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