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Hymn No. 2309 | Date: 06-May-2001
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ढूँढ़ता हूँ, खामोश वादियों से पूछते हुये, बता दे तेरा ढिकाना मुझे।
ढूँढ़ता हूँ, खामोश वादियों से पूछते हुये, बता दे तेरा ढिकाना मुझे।
चंचल पवन छेड़ते हुये कहती है, कि मैंने अभी अभी छुआ है उसे।
नभ में उड़ते हुये पंक्षी चहक उठते है तब, कि हमने भी सुना है गाते हुये उसे।
लहलहाते है डालियों पे फूल ओर पत्ते, कि थोड़ी देर पहले गुजरा था वो, यहाँ से।
दिग्त्रमित मेरा मन समझ न पाये, कैसे पहुँचा जग में हर एक समय वो।
तब हंसते हुये कहते है सभी एक संग, यही तो कमाल है प्यार का।
जब दिल में होगा प्रेम तो हर पल होने को होगा मजबूर वो हर पल संग।
चिल्लाके तब पूछता हूँ प्रभु, जिसके पास दिल न होगा वो जायेगा कहाँ।
अस्पष्ट से स्वरों में गूंजती है मन में ये बात, फल है अपनी अपनी करनी का।
फिर भी तू कर प्रयास, पुरूषार्थ का साथ लेकें पहुँच जा प्रभु के पास।
- डॉ.संतोष सिंह
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जहे नसीब जो आप जैसा मेहरबान मिला, कदरदान तो न थे फिर भी आपकी नजरे इनायत मिली।
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बड़ा बनता फिरता था, प्रभु जी भक्त हूँ तेरा।
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