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Hymn No. 23 | Date: 30-Jul-1996
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सत्य सनातन है, मानव मन से जुदा है धर्म।
सत्य सनातन है, मानव मन से जुदा है धर्म।
कुकर्मों का भोग नरक, मिथ्या ही अधर्म है ।
तन की चिंता विष है, माया जननी इच्छाओं की ।
भोग से हुआ उत्पन्न मोह,
अज्ञान और ज्ञान की खाई गयी है मिट
लक्ष्मी पुत्र कहलायें ज्ञानी, सरस्वती पुत्र बन बैठा है पागल ।
जीव – अजीव के फेर में ना पड़
कण – कण में है ईश्वर जो जान सका, इसे से मिट गया भेद ।
प्रिय बहन नूतन का जन्मदिन
- डॉ.संतोष सिंह
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