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Hymn No. 2321 | Date: 18-May-2001
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है प्रभु जी दे दे मेरे अनसुलझे सवालों का जवाब, टाला है जिन्हें तूने कई बार।
है प्रभु जी दे दे मेरे अनसुलझे सवालों का जवाब, टाला है जिन्हें तूने कई बार।
दावा तो नही ठोकता हूँ अपने प्रेम का, पर बता दे क्या मैं इतना गया गुजरा हूँ।
करवटें बदलते हुये गुजारी है कई रातें, तेरे पास आके तेरा हो जाने के लिये।
न जाने ऐसा कौन सा कर्म है मेरा राह रोके, जो आने से तेरे पास रोके मुझे।
तेरा कहा हुआँ कर दिखाने की चाहत बहुत है, करने जब जाऊँ तो असफल क्युँ हो जाऊँ।
जब जब सोचा कुछ फासला कम हुआँ तेरे मेरे बीच का, तक्षंण तुझसे दूर होते पाया।
मैं सिला नहीं देना चाहता हूँ तुझको अपने गमों का, झोली भर देना चाहूँ प्यार से अपने।
तेरे सपनों को साकार करने की चाहत लिये घूम रहा हूँ, तो भी क्यों तुझसे दूर हो रहा हूँ।
ये कैसा नसीब हमने बनाया जो तेरे करीब रहके तुझसे दूर होते जा रहा है।
भेद क्यों मेरे मन में है, जब माना हर तरह से तुझे अपना तो क्यों दूर हूँ तुझसे।
- डॉ.संतोष सिंह
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झनन, झनन झंकार उठे करते हुये दिल में झन झन की गूंज, रह ले तू मुझसे कितना भी दूर आना पड़ेगा तुझ मेरे पास जरूर।
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जल में तू, थल में तू, नभ में तू, प्रभु सारे जहाँ में तू ही तू।
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