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Hymn No. 2323 | Date: 22-May-2001
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मेरी भी फरियाद है प्रभु आज तुझसे, जिसे सुननी पड़ेगी।
मेरी भी फरियाद है प्रभु आज तुझसे, जिसे सुननी पड़ेगी।
जब तू बसता है हर दिल, तो क्यो नही होता एहसास हमको तेरा।
ओ कण कण को रचने वाले, यह मन क्यों तुझसे दूर भागता है सदा।
तेरी मेहरबानियों का शुक्रियाँ अदा कर नहीं सकता, तो कैसे जीता हूँ बगैर तेरे।
तेरी कृपा बरसती रही सदा, चाहे रहे कितने भी घोर कर्म हमारे।
दी तूने आँख, फिर भी अब तक तरसता हूँ प्रभु दर्शन को तेरे।
दिल की बात बहुत ही दिल ही दिल में, बगैर तेरे धड़कता है कैसे।
फड़कते है लब कई बार तुझसे बहुत कुछ कहने को, मन मसोस के रह जाता हूँ।
बगैर खामियो के न आता संसार में, तो किस कारण से होगा मिलन तुझसे।
तुझसे प्यार की बात करता हूँ, पर प्यार का जोरदार भाव क्यों नही पनपाता मन में।
- डॉ.संतोष सिंह
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जल में तू, थल में तू, नभ में तू, प्रभु सारे जहाँ में तू ही तू।
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माना प्रभु मोहताज नहीं है तू हमारा, न ही परवाह है तुझे किसीकी।
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