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Hymn No. 2355 | Date: 13-Jun-2001
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सबसे अजीब होती है तेरी बातें फिर भी रुचती है मन को।
सबसे अजीब होती है तेरी बातें फिर भी रुचती है मन को।
सबसे विपरीत है तू फिर भी खींचता है दिल को।
बयां करना अक्सर, मुश्किल हो जाता है तेरे अंदाज को।
कभी कभार अच्छे खासे निकल पड़ते है सब कुछ छोड़कर तेरी ओर।
क्या तू कर जाये किसीके संग, कहना होता है मुश्किल।
रमता है तू अपनी मौज में, बरसाते हुये मस्ती की बारिश।
हर जन्मों में अलग अलग, तौर तरीकों से जीने का अंदाज बताया।
कितना भी हो जाये कोई तेरा हमराज, बिना मिटे जान न पाया।
बयां करना मुश्किल है शब्दों से, तुझ तो महसूस करना होता है दिल में।
नीति नियंता होते हुये फिर भी छोड़ रखा है सबको कर्मों के सहारे।
- डॉ.संतोष सिंह
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हें दीवानगी क्या होती है न जाना था हमने, जब हुये मुँहताज उसके दीदार को तो जान गये
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