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Hymn No. 2358 | Date: 15-Jun-2001
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ता रा री री रि रू ओम रू रू रु ता रा ...
ता रा री री रि रू ओम रू रू रु ता रा ...
नजर मिलते ही बांध लेते है, उसके नैनो कैसे चैन पाये मेरा दिल।
धक से रह जाता है दिल, जो देख लेता हूँ अचानक उसको करीब अपने।
जागते खो जाता हूँ ख्वाबों में, जब गढ़ने लगता हूँ नई नई दुनिया प्रेम की।
पास उसके रहने पे लग जाती है झूठी, नैनो से रैन न जाने क्यों।
मन की सारी अस्थिरता खोके अपलक निहारता हूँ यूं ही उसको।
बह जाता है समय न जाने कैसे, ख्याल तब आता है जब साथ होने के लिये कहता है वो।
धीरे धीरे क्या से क्या होता जा रहा है, मैं का मैं जो बदलते जा रहा है।
मानेंगे नहीं पर बड़ी मुश्किल होती है, जब रहके रहता नहीं वो पास अपने।
मिलने बिछुड़ने से बेचैन हो गया हूँ, मिलन के लिये तरस बढ़ती जा रही है।
- डॉ.संतोष सिंह
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