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Hymn No. 2400 | Date: 22-Jul-2001
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सुना, सुनाके मत टाल तू कर्मों की लेखी, ओ भाग्य का फसाना बुननेवाले।
सुना, सुनाके मत टाल तू कर्मों की लेखी, ओ भाग्य का फसाना बुननेवाले।
तू मत टाल गाके अफसाने किस्मत के, तो किसीको सुनाऊँगा दिल का हाल अपने।
बस तेरा कहा हुआ तो करता हूँ, तुझे ही तो प्यार करने को मजबूर करता हूँ।
होगी लाखों कमी पर हर रोज तेरी, ओर चलता हूँ, धीरे धीरे मन की हर बात कहता हूँ।
हारा होगा लाखों बार, फिर भी अगला प्रयास करने से न कभी चूका हूँ।
बिताती हुई जिंदगी में किसी के वास्ते चाहके भी न कभी रुका हूँ।
तन मन हो या दिल खिला जाता है, जो तेरी ओर से कुछ याद आ जाता है।
सुकुन हर हाल में बस तुझमें पाता हूँ, जिंदगी के सारे सपनो में तुझे जोड़के देखता हूँ।
तेरे सिवाय लेना देना न रहा किसीसे, जो भी चर्चा करुँ बस तुझीसे।
अपने हाथों में न था कभी कुछ, थामा हूँ जो तेरा हाथ तो परवाह किसीकी क्यों करूं मैं।
- डॉ.संतोष सिंह
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