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Hymn No. 2782 | Date: 19-Apr-2004
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कह लो कितना भी, कहता है दिल, तू मेरा है, तू रहेगा मेरा, तू मेरा होगा।
कह लो कितना भी, कहता है दिल, तू मेरा है, तू रहेगा मेरा, तू मेरा होगा।
लाख झुठलाऊँ खुदको, फिर भी आऊंगा, तेरे गीतों को गाऊंगा, तुझे जीके दिखाऊंगा।
फरियादों का न लूंगा आसरा, ना ही आस खोऊंगा, तेरा दास बनके दिखलाऊंगा।
किया है जो भी मन के चलते, करुँगा प्यार मन को संयत करके, मन को नाथ के नाथ के पास आऊँगा।
वॉजिब है जीवन मैं उलट पुलट होना, वाजिब नहीं कर्मों का रोना, हर हाल मैं एक सा रहूँगा।
किसी से प्यार हो या जीवन का कोई ओर व्यवहार, होने न दूंगा पल भर को अलग तुझे, पल पल संग।
बदनाम जरूर हूँ, बदनाम न होने दूंगा तुझे, राख होने से पहले हमेशा के वास्ते हो जाऊँगा तेरा।
तू तो जानता है सब कुछ, इसलिये कहलाता है रब, ये साथ छूटे उससे पहले कसके तेरा हाथ थाम लूं।


- डॉ.संतोष सिंह