VIEW HYMN

Hymn No. 2785 | Date: 25-Apr-2004
Text Size
मां करता हूँ गुहार तुझसे एक नहीं अनेकों बार,
मां करता हूँ गुहार तुझसे एक नहीं अनेकों बार,
तू है परम् सामर्थ्यवान तो क्यों नही ठीक करती समर्थ को।
वो तुझसे न कहने कुछ कभी जायेगा, चाहे कुछ हो जाये कभी,
तू सून ले हम सबकी गुहार, ठीक कर दे हमारे साथ को।
हमारे किये को भोगे तन पे अपने, हंसके सहता जाये दर्दो को,
बिना कुछ कहे हम सबसे, चुपचाप बदलता जाये हम सबको।
उसके दर्दो से कैसे है तू अनजान, भान मैं रहते क्यों रहते बेभान,
नाच़ीज लायक तो न है कुछ के, कर दे उपकृत ठीक करके पिता को।
जलता हूँ रात दिन एक ही आग मैं, ख़ाक होने से पहले,
दे दूं सुकून् नाथ को, जिसने जीवन को किया है हर पल गुलजार।


- डॉ.संतोष सिंह