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Hymn No. 2852 | Date: 20-Oct-2004
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लोगों की समझ को अपनी समझ न बनाओ, प्रभु की समझ को अपनाओं।
लोगों की समझ को अपनी समझ न बनाओ, प्रभु की समझ को अपनाओं।
पड़ो ना तुम जात पात के फेरे को, सबसे बड़े धर्म मानवता का जीते जाओ।
संसार गाथा को गाने के चक्कर मैं हो हल्ला ना मचाओ, चूपचाप तुम राम कथा को गाओ।
क्या ना हुआ या में होता से परे हो जाओ, जो हो रहा है उसमें रहना सीख जाओ।
कमियों को रोना रोना छोड़ो, जो मिले उसके वास्ते प्रभु को तहे दिल से धन्यवाद देते जाओ।
बहुत अकड़ के जिया, अब अहम को त्याग के, झुक के झुकाना औरों को जान जाओ।
बुना बहुत जाल दुनिया को फंसाने वास्ते, अब बुनो प्यार का फंसाना प्रभु को फंसाने के वास्ते।
ध्यान से लेते जाओ प्रभु नाम कुछ समय के बाद देखोगे तुम हो गये बेध्यान दुनिया से।
मर के भी अंत नहीं दुनिया का, मर के क्या अंत होगा दुनिया का, जो दुनिया में रहते किया नहीं पाओगे अनंत में।
हारे बहुत बार, जीते भी बहुत बार, हार जीत के फेरे से निकलकर प्रभु के बन जाओ।
- डॉ.संतोष सिंह
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