My Divine
Home
Bhajan
Quotes
About Author
Contact Us
Login
|
Sign Up
ENGLISH
HINDI
GUJARATI
My Divine Blessing
VIEW HYMN
Hymn No. 2871 | Date: 03-Nov-2004
Text Size
मेरे हृद्य द्वार पे, तुम दस्तक देते हो बार - बार,
मेरे हृद्य द्वार पे, तुम दस्तक देते हो बार - बार,
फिर क्यों बैठा हूँ, में आँखे मूंदकर उदास।
तुम आते हो जाते हो, यादों के झरोखों से,
मैं क्यों नहीं कह पाता हूँ खुलके, बस जाओ तुम अंतर में मेरे।
खेल ये कैसा है, प्रेम में एक व्यथित उदास है,
तो दूजा आनंद मैं निमग्न, अपने आप मैं मगन है।
तुम तो हो वेदों के साक्षात सार, प्रेम के द्वार,
कब करोगे मेरे अनदेखे सपनो को साकार।
माना तुम्हारे चाहने वालों की एक लंबी कतार है,
पर जहा तक में जानू उससे भी ज्यादा तुम उदार हो।
- डॉ.संतोष सिंह
Previous
ये तेरी दरियादिली क्या कम है, जो गाते है गीत तेरे प्रेम के,
Next
उड़के चला जाना चाहता हूँ, कल्पनाओं के पास,
*
*