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Hymn No. 36 | Date: 27-Sep-1996
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ऐ प्रभु जी सुनो, मेरी गुहार क्यों छोड देते ही बीच गझधार में,
ऐ प्रभु जी सुनो, मेरी गुहार क्यों छोड देते ही बीच गझधार में,
अपने भक्तों की, कहीं खोट तो नहीं हमारी भक्ति में ।
अरे शक्ति दे इतनी, हो जाये मगन तेरी भक्ति में ।
दे दे ऐसा आशीर्वाद गाये तेरे गीत, बन जाये तेरे मीत ।
मगन हो के नाचूँ तेरे आँगन में, तन का साथ छोडके
मन के संग उड, तेरी गोद में जा बैठूँ ।
- डॉ.संतोष सिंह
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