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Hymn No. 48 | Date: 30-Oct-1996
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मनवा न मानें मोरा, मन फिरें तो मति फिर जाये ।
मनवा न मानें मोरा, मन फिरें तो मति फिर जाये ।
सद्गति – दुर्गति में बदल जाये नजर – नजर में फर्क कर जाये ।
अपने भी पराये नजर आयें, साथ ले, फेर ले इस मन को,
हर मूर्त में ईश्वर नजर आये, अरे मूर्त को द्दोड़,
हर सूरत में नजर आये, जीवन तो जुड़ा है इस मन से
जिसने कसके थामी, चाहे जहाँ दौड़ाये। लगाम जिसकी हाथ
से छूटी इसकी, ले दौडा ये उसको, पटकेगा विषयों के घर में ।
अमर मन जुड जाय आत्मा से, तो हर कण मे ईश्वर नजर आवे ।
ना जुड़ा तो खुद से बैरकरा बैठे, गजब है तू मनवा अजब तेरी कहानी ।
- डॉ.संतोष सिंह
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