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Hymn No. 515 | Date: 20-Dec-1998
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धडक रहा है दिल लयबध्द होके तेरा नाम लेतें हुये ।
धडक रहा है दिल लयबध्द होके तेरा नाम लेतें हुये ।
कंपन हो रहा है तन के रोम – रोम में तरे नाम के गुंज से ।
निर्दूदं होके मन मेरा तूझे असिमीत प्यार करना चाहता है ।
हर आशंका – कूशंकाओ से मुक्त तेरे चरणों के करीब रहूँ मैं ।
भाव के सागर में बहता जा रहा हूँ, तेरे सिवाय यकोई ठौर – ठिकाना नहीं ।
हर बंधन को तोड़ने के लिये बेकल मैं, हाथें में हथियार तेरे नाम की ।
तुझसे मिला हूँ कई बार मैं, फिर भी तरस रहा हूँ मूलाकात के लिये ।
जीवन दीप की तरह जलता रहेगा तेरे दीदार के लिये ।
हार – जीत से हीं दूर बन जाये, यें जीवन तेरे चरणों की धूल ।
- डॉ.संतोष सिंह
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सौगात तूझे देना चाहता हूँ बढियाँ से बढियाँ, अपने दिल के सिवाय कूछ ना पाता हूँ ।
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जनम लें रहा है मन के भीतर तेरे प्यार का अंकूर ।
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