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Hymn No. 739 | Date: 13-Feb-1999
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तूने कितना रुप बनाया, तूने कितना स्वाग रचाया ।
तूने कितना रुप बनाया, तूने कितना स्वाग रचाया ।
धरा पे जब-जब तू आया, कभी राम-कृष्ण कहलाया ।
निकट तेरे बहुत से लोग आये, पहचान कोई नहीं पाया ।
तूने जब-जब प्रेम भरा गीत गाया, परम तब तेरा ध्यान आया ।
इक और प्रेम के रूप निकट हमने खुद को पाया ।
कल्याणकारी तू सदा से रहा, कल्याण के सिवाय तूने कुछ ना किया ।
हमारे पीछे-पीछे न जाने तू कितनी बार आया फिर भी जान न पाया ।
समझ में नही आता, यें खेल क्यूं हम है दोहराते ।
जब-जब याद तेरी आती है पास तुझे खुदके पाते है ।
प्यार तेरा देखके दिल करता है, अब नाता तुझसे सदा के लिये जोड़ने को ।


- डॉ.संतोष सिंह