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Hymn No. 9 | Date: 24-Jun-1996
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रत हो जाऊँ; नत हो जाऊँ तेरे चरणों में ;
रत हो जाऊँ; नत हो जाऊँ तेरे चरणों में ;
सुध – बुध खो बैठूँ तेरे ध्यान में ।
कुछ अपनी सुनाऊँ, कुछ तेरी सुनूँ
झूम उठें; हम – तुम मिल के
रहे भान सिर्फ तेरा ; ना करुँ ध्यान इस मायावी जग का ।
- डॉ.संतोष सिंह
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