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Quote No. 1033 | Date: 27-Jul-2017
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कुछ भी न था, कुछ भी न हूँ, ख़ाकसार को खाक में मिटाने को क्यों है कीस्मत तुली |
कुछ भी न था, कुछ भी न हूँ, ख़ाकसार को खाक में मिटाने को क्यों है कीस्मत तुली |
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देवेंद्र घिया( काका )
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