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Quote No. 143 | Date: 27-Apr-2001
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समझ नही आता यारों की महफ़िल में कौन गैर हैं कौन अपने? |
समझ नही आता यारों की महफ़िल में कौन गैर हैं कौन अपने? |
रह रहके हर कीरदार हैं वे, सब निभाते, जो हो जाती चूक जरा सी भी |
 

देवेंद्र घिया( काका )


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