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Quote No. 323 | Date: 30-Dec-2001
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बहुत बार फिरता हूँ यादों में, खोए हुए ख्वाबों को तलाशते |
बहुत बार फिरता हूँ यादों में, खोए हुए ख्वाबों को तलाशते |
न जाने क्या ऐसा है, जो पूरे नहीं हो पाते ज़िंदगी के यथार्थों में |
 

देवेंद्र घिया( काका )


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