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Quote No. 433 | Date: 26-May-2002
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चले थे विश्वास से पुरुषार्थ की राह पे, की मंज़िल को आज नहीं तो कल पायेंगे?|
चले थे विश्वास से पुरुषार्थ की राह पे, की मंज़िल को आज नहीं तो कल पायेंगे?|
करनी करनी में भेद करके फँसे जो दलदल में तो फिर से पहुँच गए कीस्मत के रास्ते पे |
 

देवेंद्र घिया( काका )


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