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Quote No. 469 | Date: 26-May-2002
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नज़ारे एक के बाद न जाने कीतने आये?, पर सबको गुजरते पाया |
नज़ारे एक के बाद न जाने कीतने आये?, पर सबको गुजरते पाया |
माया के परदे पे भी तुझको छोड़, कीसी और को न टिकते पाया |
 

देवेंद्र घिया( काका )


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