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Quote No. 506 | Date: 09-Oct-2002
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हर दिन भर जाता है एक और पन्ना ज़िंदगी का |
हर दिन भर जाता है एक और पन्ना ज़िंदगी का |
कोरी कीताब देखते-देखते, पहुँच जाती है रद्दी के ढेर में |
 

देवेंद्र घिया( काका )


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