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Quote No. 519 | Date: 09-Oct-2002
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आये थे यार के वास्ते, कब भटक गए पता ही न चला |
आये थे यार के वास्ते, कब भटक गए पता ही न चला |
समय रहते उसने पास बुलाया, श्वास रहते क्यों ना पहचान पाया |
 

देवेंद्र घिया( काका )


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