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Quote No. 570 | Date: 09-Oct-2002
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एक पल, दो पल न जाने ज़िंदगी के कीतने पल गुज़र गए |
एक पल, दो पल न जाने ज़िंदगी के कीतने पल गुज़र गए |
पलों के इस खेल में, न जाने कीतनी ज़िंदगी मौत में बदल गई |
 

देवेंद्र घिया( काका )


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