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Quote No. 575 | Date: 15-Jan-2003
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दुनियाँ को रोज़-रोज़ लूटने से अच्छा है, लूट लो एक बार परवर दिगार को |
दुनियाँ को रोज़-रोज़ लूटने से अच्छा है, लूट लो एक बार परवर दिगार को |
रोज-रोज के लूटने की छुट जाएगी झंझट, जो लूट लिया हर बार के लिए परवर दीगर को |
 

देवेंद्र घिया( काका )


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