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Quote No. 776 | Date: 25-Mar-2008
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उमड़ते-घुमड़ते बादल, आज नहीं तो कल कहीं न कहीं बरसते हैं |
उमड़ते-घुमड़ते बादल, आज नहीं तो कल कहीं न कहीं बरसते हैं |
तू ही बता मन में उमड़ने वाले बादलों की बरसात कीसके दर पे हो |
 

देवेंद्र घिया( काका )


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