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Quote No. 854 | Date: 28-Apr-2009
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जी रहा हूँ स्वत: के अंदाज को, भुगत रहा हूँ अपने अंजाम को |
जी रहा हूँ स्वत: के अंदाज को, भुगत रहा हूँ अपने अंजाम को |
कहाँ कीसी का इसमें दोष है, जो तुझसे पृथक हूँ उसी का रोष है |
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अगर दूर रहने से प्यार ख़त्म हो जाता, तो तुझसे ज्यादा कोई दूर है नहीं
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देवेंद्र घिया( काका )
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