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Quote No. 984 | Date: 04-Jan-2013
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एक पल, दो पल, घंटों तेरे साये में रहना चाहूँ
एक पल, दो पल, घंटों तेरे साये में रहना चाहूँ
पल भर की बिछड़न बर्दाश्त नहीं, अब तो श्वास भी तंग लगने लगे |
 

देवेंद्र घिया( काका )


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