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“
दिनांक: 27-Jul-2017
तमाशा बन गयी ज़िंदगी, अपने ही लोगों के बीच
कुछ न कर सका, जो कीरदार ही मिला था चुप रहने का |
”


- डॉ.संतोष सिंह


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