“ दिनांक: 02-Apr-2001 मेरी बेखयाली को नाम न दो बेवफाई का | मेरी नादानी को नाम ना दो बदखानी का | बंदे का ईमान है सच्चा, भले मन का है कच्चा | गच्चा तो न दिया गैरों को, तो अपनों की बात कहाँ? ” - डॉ.संतोष सिंह Share