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“
दिनांक: 18-Jun-2001
कबूल करते करते बन गया हूँ बबूल का पेड़ |
कड़वाहट भरी हैं अंतर में, काँटों से सज गया मन मेरा |
”


- डॉ.संतोष सिंह


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