“ दिनांक: 16-Oct-2002 चलते वक्त न जाना था, चलते चलते चले गए और तेरे | अब तो चलते चले जा रहे हैं, पर ख़ास बात क्या है इस बात का अहसास ना है दिल को | ” - डॉ.संतोष सिंह Share