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“
दिनांक: 06-Mar-2001
गुले गुलशन में फूल हैं हजारों, उसमें से महके दो चार |
सफर पे चलते हैं हजारों, पर मंज़िल पे पहुँचते हैं दो-चार |
”


- डॉ.संतोष सिंह


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