“ दिनांक: 19-Aug-2004 संसार का सार है 'प्रभु प्रेम’, मानव जीवन की अंतिम मंज़िल है 'प्रभु प्रेम'| समस्त ज्ञान का निचोड़ है प्रभु प्रेम, हर धर्म का सत्य है ’प्रभु प्रेम’ | ” - डॉ.संतोष सिंह Share