“ दिनांक: 18-Apr-2005 रहते रह जाते है दुनियाँ में, चलते चलते चले जाते हैं कहीं और? मोहब्बत के नाम पे मनमाने कर्म करके दिल को बदनाम करते हो | ” - डॉ.संतोष सिंह Share