“ दिनांक: 08-Apr-2005 जलता है दिल यादों में खोते ही तब तड़पता हूँ रात-दिन विरह में, अंजाम की तो 'खुदा जाने’, पर दिल का अहसास होता है कीसी कोने में | ” - डॉ.संतोष सिंह Share