“ दिनांक: 17-May-2005 खग में विचरते पाखी साँझ ढले लौटे घर को रहे कीतने भी दूर मेरा हाल भी है ऐसा, जब-जब कौंधे जहन में तस्वीर तेरी | ” - डॉ.संतोष सिंह Share