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दिनांक: 12-May-2009
दिल और मन से परे कोई है, जो तेरी टोह लेता है |
चैन से भरे तन मन में, दिन-रात वो छटपटाता है |
ढूंढने को ढूंढता हूँ कई बार, पर वो जवाब नहीं देता है |
ख़ामोशी के लिहाफ में, भाईध्म सा अहसास उसका होता है |
गहरे इतना छिपा हुआ है, और गहरे उतरा नहीं जाता है |
आज कल, जब देखो तब, रसोल उसका बहुत आता है |
रसोल पे सवार होते है, याद तेरी वो दे जाता है पास पहुँचते पहुँचते |


- डॉ.संतोष सिंह


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