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“
दिनांक: 04-Sep-2009
प्रभु श्वेत ज्योत बंद आँखों के बिच जलती है,
न जाने क्यों लगता है वहां अपना परम प्रियतम रहता है |
”


- डॉ.संतोष सिंह


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