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“
दिनांक: 03-Dec-2009
गुफा में कैद है हमदम, दीवार बन गयी हसरत |
यारों ने लिहाफ ओढ़े रखा, नजर भर को तरसते रहे हम |
”


- डॉ.संतोष सिंह


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