Read Quote

“
दिनांक: 06-Nov-2009
चस्पाया हुआ छूटता नहीं, बेगैरत भरी जिंदगी में |
बंदगी का आलम देखो, चरमरा के टूटता है पल में |
”


- डॉ.संतोष सिंह


Share