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Hymn No. 1020 | Date: 28-Apr-1999
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याद तेरी जब सताती है, तो उभरती है तसवीर नजरों में ।
याद तेरी जब सताती है, तो उभरती है तसवीर नजरों में ।
सनम कसम से मन में हर पल रहता है तेरा खयाल ।
घायल कर गया तू दिल को जब से मुलाकात हुयी है तुझसे ।
मुझपे मेरा वश न रह गया, तेरा अधिकार है पूरा ।
बची न है कोई साध, जो होंगे हर पल हम तेरे पास ।
रहम कर हमपे स्वीकार कर ले चरणों में तेरे ।
अंत कर दे मन की अनंत सीमाओं के अपने अनंत में ।
वहाँ न रहेगा कोई भेद, मेल हो जायेगा रिक्त का रिक्त से ।
सवार हो चुका हूँ दिल की मौजों पे, पहुचेगे आज नहीं तो कल ।
मस्त हो चुका हूँ अपनी धुन में, जब से प्यार हो गया तुझसे ।


- डॉ.संतोष सिंह